रचनात्‍मकता को पुरस्कृत करे

हर छात्र में कोई ना कोई खास बात होती है  जरुरत  होती है इस रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने की। हर बच्चा एक कलाकार होता है, समस्या यह है कि, आप बड़े हो जाने पर, अपने अन्दर के कलाकार को जिंदा कैसे रखें।
अगर आप अपने अन्दर एक आवाज़ सुने की तुम पेंट नहीं कर सकते तो पेंट करने की हर संभव कोशिश करें और वह आवाज़ अपने आप गायब हो जाएगी।
कल्पना शुरुवात है रचना की। आप वह कल्पना करते हो जिसकी आपको इच्छा है, आप वह बन जाओगे जो आप कल्पना करते हो, और अंत में, आप उसकी रचना करोगे जो आप चाहोगे।
रचनात्मकता तो बस चीजों को जोड़ना है। जब आप रचनात्मक लोगों से पूछ्तें हैं कि आपने यह कैसे किया, तो वे थोड़े शर्मिंदा महसूस करतें हैं, क्योंकि वास्तव में उन्होंने यह नहीं किया होता है, उन्होंने कुछ देखा। कुछ समय बाद उन्हें अपना काम सामान्य लगने लगता है।
बहुत सारे आयडियाज़ (नये विचार) होना अच्छा है, भले ही उनमे से कुछ गलत भी हों, इस बात से कि आप हमेशा सही हों और आपके पास कोई आयडिया ना हो
रचनात्मकता नयी खोज करना है, नया प्रयोग करना है, रिस्क लेना है, नियमों को तोडना है, गलतियाँ करना है, और मज़ा करना है
रचनात्मक कार्य का सबसे ऊँचा पुरस्कार  जो हमें मिल सकता है वह रचनात्मक होने का सुख है।
हमारी सीख - आइसक्रीम मेकर by सुबीर चौधरी
अजय विजयवर्गी , कुसुम डांगी , तरुण मिश्रा , उस्मान गनी
The Fabindia School


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