पूर्णता पाने की कोशिश करें।

पूर्णता अर्थात कर्म में स्वयं को पूरा डूबना, अपने काम में समर्पण लाना।  आध्यात्मिकता में डूबे हुए एक व्यक्ति की चर्चा करें जो प्रातःकाल उठकर 'कराग्रे वसते लक्ष्मी' कहते हुए ईश्वर को प्रणाम करता है, धरती को प्रणाम करता है, नदी पर स्नान करने जाते समय जल को प्रणाम और सूर्य को अर्ध्य देता है, लौटते हुए मंदिर में प्रणाम करता है तथा भोजन करते समय अन्न को प्रणाम।  अर्थात हर समय अपनी आध्यात्मिकता में खोया रहता है, इसी का नाम पूर्णता है।
दौड़ में लगकर केवल सर्वश्रेष्ठ ही नहीं बनना है बल्कि पूर्णता प्राप्त करना है। 'सर्वश्रेष्ठ' वाला पद एकबार मिल जाए फिर व्यक्ति अपने कार्य में शिथिल हो सकता है परन्तु पूर्णता की चाह हमें शिथिल नहीं होने देती।  पूर्णता का शाब्दिक अर्थ त्रुटियों या दोषों से रहित होने  की स्थिति।
पूर्णता पाने के प्रयास में असफलता हाथ लग सकती है।  लेकिन पूर्णता पाने के लिए असफलता की कीमत पहचानने की आवश्यकता है।  असफलताएँ भी हमारा अनुभव बढाती है। असफलताओं के डर से प्रयास करना नहीं छोड़ें।  असफलता हमें बताती है कि सफलता पाने के प्रयास में कुछ गलती कर रहें है, जिसे हमें सुधारना है। सोहनलाल द्विवेदी की एक कविता की पंक्तियाँ -
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
सफ़ल होने के लिए.......
1. प्रयत्न करें कि पहलीबार में ही सही काम हो जाए।
2. छोटी-छोटी बातों पर हमारी पैनी निगाह हो।
3. लेखक सुबीर चौधरी के अनुसार 'सकारात्मक अति-चिंतन' का एहसास विकसित करें।
4. अपने साथ-साथ सहयोगियों में भी पूर्णता का जोश भरना।
5. नवीन प्रयोगों से घबराएँ नहीं, चाहें जितने प्रयोग असफल हो जाएँ, अगले किसी प्रयोग में सफलता मौजूद होगी।
6. अपनी जानकारी और तर्क-शक्ति को बढ़ाएँ।
याद रहे कि- "यदि हार की कोई संभावना नहीं तो जीत का कोई अर्थ नहीं रह जाता। "

हमारी सीख- आइसक्रीम मेकर से (लेखक-सुबीर चौधरी )
समूह सदस्य- विनीत सिंह, बायजु जोसफ, कविता देवड़ा, कृष्ण गोपाल - The Fabindia Schook
Post a Comment

Brewing Knowledge Weekly