भावना शर्मा : पारंपरिक शिक्षा तथा आधुनिक शिक्षा

एक कहानी के अनुसार: एक पारंपरिक गुरु तथा उनके साथ थे एक आधुनिक युग के  गुरु दोनों परम मित्र थे l दोनो ही जंगल के रास्ते जा रहे थे तभी उन्हें किसी खतरे का आभास हुआ । पारम्परिक गुरु ने तुरंत ही एक तख्ती तैयार की और उस पर लिखा कि कृपया यहीं रुकें आगे न जाये आपका जीवन संकट में है । उस तख्ती को कोई भी नही देख रहा था सभी चलते जा रहे थे तभी एक कार गुज़री और आगे जा के धमाके के साथ गिर गई गुरु बोले जैसी प्रभू की मर्ज़ी । जब कोई दुर्घटना हो गुरु यही बोलते । अब बारी आई आधुनिक गुरु की गुरु जी ने एक और तख्ती तैयार की उसके बाद एक भी दुर्घटना नही हुई । क्योंकि उस तख्ती पर लिखा था कि आगे न जाएं आगे पुल टूटा हुआ है ।

यही सोच पारम्पारिक और आधुनिक शिक्षा में फर्क करती है । पारम्परिक शिक्षा का मुख्य उद्देश्य था विद्यार्थियों को उनको परम्पराओं और संस्कृति से जोड़ना तथा पीढ़ी दर पीढ़ी इस रिवाज़ को आगे बढ़ाना । विद्यार्थी पूर्ण अनुशाषित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करते और अपने जीवन मे उन सभी शिक्षा प्रद बातों को ग्रहण करते । उस समय कागज़ कलम और पुस्तकों से पढ़ने के बज़ाय विद्यार्थी का चरित्र गठन करना और जीवन में उसे दूसरों को हित करना ही शिक्षा का मुख्य उद्देश्य था । समकालीन अर्थात आज की शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सभी को जीवन में आगे बढ़ने सफलता प्राप्त करने के समान अवसर प्रदान करना है|

हर बच्चे का अपने जीवन में कुछ अलग करने का सपना होता है जैसे कुछ को संगीत में रूचि है तो किसी को खेल कूद में , किसी को नृत्य में । ये सभी कार्य विद्यार्थी अपनी शिक्षा के साथ ही जारी रखते हैं । जो कि आधुनिक शिक्षा में ही संभव है । वर्तमान शिक्षा का तंत्र अब पूरी तरह बदल चुका है । इस शिक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने के लिए जरूरत है ऐसे शिक्षको की जो कि अपने विद्यार्थियों का उचित मार्गदर्शन कर सकें उनकी मुश्किलें और कठिनाइयों को आसानी से परिवर्तित कर सकें । एक अच्छा दोस्त बनें, एक अच्छा सलाहकार बनें क्योंकि परम्परागत और आधुनिक शिक्षा का एक ही लक्ष्य है और वह है, "एक शिक्षित समाज की स्थापना"|

भावना शर्मा 
Responsible Icons, The Iconic School Bhopal
The Educators at The Iconic School are reading Kavita Ghosh’s Book for the Level II of the Learning Forward India three-year Professional Learning Program. 

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