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एकता और देखभाल: आयशा टॉक


एकता का मतलब है मिलजुल कर साथ रहना। इसका मतलब प्रतिकूल परिस्थितियों में एक-दूसरे की मदद करना और समर्थन करना है। एकजुट रहना मजबूत सम्बन्ध बनाने और एक मजबूत समाज बनाने की कुंजी है। एकता में बड़ी ताकत होती है, जिसे आप और हम सभी जानते हैं। एकता की ताकत से हम किसी भी असम्भव लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकते हैं। एकता हमारे जीवन में हर कदम और हर स्तर पर जरूरी है। जो लोग एकजुट रहने के महत्त्व को सीखते हैं और उनका पालन करते हैं, वे लोग खुश और संतुष्ट जीवन जीते हैं। जो लोग इसके महत्त्व को नहीं समझते हैं, वे अक्सर जीवन में विभिन्न चरणों में विभिन्न कठिनाइयों का सामना करते हैं। 

ठीक इसी तरह हम विद्यार्थियों को बचपन से ही मिल-जुलकर एकता से रहने की शिक्षा देनी चाहिए। इसके लिए हम विद्यार्थियों के कुछ समूह बनाकर, उनको कुछ कार्य समूह में करने के लिए दे सकते हैं। इससे विद्यार्थी एक-दूसरे का सहयोग करते हुए एकतापूर्वक कार्य को सफलता से पूरा करेंगे और एक-दूसरे की भावनाओं की कद्र करना व एकता का महत्त्व बहुत ही आसानी और गहराई से सीखेंगे। 

किसी की देखभाल करना न केवल सामने वाले के लिए अच्छा है, बल्कि यह एक अच्छी बात है। इससे मन को बहुत संतुष्टि एवं खुशी मिलती है। यह हमें दूसरों से जोड़ता है और एक मजबूत समुदाय बनाता है और एक खुशहाल समाज बनाने में मदद करता है। बच्चों में शुरू से ही अपनी चीजों की देखभाल करने की आदत विकसित की जानी बहुत जरूरी होती है। इसके लिए सर्वप्रथम उन्हें उन वस्तुओं का हमारे जीवन में जो भी महत्त्व है, वह उन्हें बताना बहुत जरूरी होता है। इस प्रकार हम उन्हें छोटी-छोटी चीजों का महत्त्व बताते हुए उनमें उनके प्रति देखभाल की भावना विकसित कर सकते हैं। 

उन्हें यह भी सिखाना चाहिए कि अगर घर में उनसे छोटा कोई बच्चा है, तो वह उसका भी ध्यान रख सकते हैं। घर में कोई बुजुर्ग है, तो उनकी भी सेवा एवं मदद करके उनकी देखभाल कर सकते हैं। अपनी कक्षा में अपनी बैठने की मेज-कुर्सी हैं उन्हें तोड़े नहीं, उनका ध्यान रखें। अपनी पुस्तकों को सहेज कर रखें उन्हें फाड़े नहीं। किसी बेजुबान प्राणी को सताए नहीं उनकी देखभाल करें। अध्यापक भी बच्चों का कक्षा एवं विद्यालय में पूरा ध्यान रखें एवं उन्हें प्रेमपूर्वक समझा कर अच्छे-बुरे का ज्ञान समय-समय पर कराते रहें। इस प्रकार हम विद्यार्थियों में देखभाल की भावना विकसित कर सकते हैं। 
Ayasha Tak
The Fabindia School, Bali

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