Friday, September 11, 2020

गुणवत्ता और प्रेम: राजेश्वरी राठौड़


आप किसी भी विभाग में काम करते हैं तो उस जगह आपको हर बात का ध्यान रखकर अपने गुणों के स्तर को बढ़ाना और वह कार्य को अच्छी तरह करना है। जिससे ग्राहक को संतुष्टि हो सके ऐसे ही विद्यालय में भी हम सब को नैतिक मूल्यो से जोड़कर एकता के सूत्र में बाँध कर रखते है और हम सबको एक दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करता है ताकि हम अपने विभाग में छोटी-छोटी गतिविधि को जाने और विद्यालय को जाने और उनकी संतुष्टि को हासिल करने के लिए वचनबद्ध रहे और अपने कार्य में रोजाना सुधार लेकर आए ताकि हम अपने परिवार का अपने विद्यालय का पूरी दुनिया में नाम कर सकेअगर सभी कर्मचारी एक खुले दिमाग से साथ काम करें तो गुणवत्ता को सामने लाए तो सफलता अवश्य संभव है

प्रेम का एहसास जो दिमाग से नहीं दिल से होता है। मानव समाज के लिए प्रेम एक सर्वोत्तम सौगात हैंप्रेम प्रकृति का है अनमोल उपहार है, जो मानव जाति का अस्तित्व है जो जीवन में मिठास घोल देता हैकटुता दूर करके व वात्सल्य तथा भाईचारे के संचार में प्रेम की महती भूमिका हैऐसे ही विद्यालय में शिक्षक सभी विद्यार्थियों को सच्चे प्रेम का पुष्प कोमल भावनाओं की भूमि पर आपसे विश्वास और मन की पवित्रता के संरक्षण से ही खिलता और महकता हैं

प्रेम मानव मन का वह भाव है, जो कहने सुनने के लिए नहीं बल्कि समझने के लिए होता हैउससे भी बढ़कर महसूस करने के लिए होता है प्रेम ही मानव जीवन की नीवं है। प्रेम के बिना सुखमय इंसानी जीवन की कल्पना तक नहीं की जा सकती हैंसच्चा प्रेम केवल देने और देते रहने में ही विश्वास करता हैजहाँ प्यार है वहाँ समर्पण है जहाँ समर्पण है वहाँ अपनेपन की भावना है। इसलिए मनुष्य को एक दूसरे से प्रेम से रहना चाहिए
Rajeshwari Rathore 
The Fabindia School

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