उषा पंवार: मधुरवाणी

हमारी  वाणी  में  इतनी  शक्ति  होती  हैं  कि  हम  किसी  को  भी  अपना  बना सकते  हैं  और  किसी को भी अपने से  दूर   कर सकते हैं यदि हम   प्रेम  पूर्वक  किसी  से  बातचीत करते हैं तो अवश्य ही   वे अपनी ओर   आकर्षित  हो  जाएँगे और  यदि हम कर्कश    कठोर  शब्दों का प्रयोग करते हैं तो कोई भी हमसे दूर हो  सकता  है अथवा   कोई भी हमसे बातचीत   करना  पसंद नहीं करेगा। मधुर वाणी   केवल  सुनने  वालों को ही नहीं बल्कि  बोलने वाले को भी  आत्मिक सुख प्रदान करती हैं।

किसी के दुख़  में  हम  सहानुभूति के शब्द  भी  बोल  दे  तो  वे उसे  बहुत  सहारा  देते हैं   मृदुभाषी  सदा  सम्मान  पाते हैं । सभी लोग  उनकी  प्रशंसा  करते हैं   प्रेम- सौहार्द से समाज में मेल  जोल  बढ़ता   हैं।

कबीरदास  जी  कहते  हैं  कि ''ऐसी  बानी  बोलिए मन  का  आपा खोए,  औरन  को  शीतल  करै,  आपहु  शीतल  होय”।

विनम्र  स्वभाव  और  मीठी  वाणी  का  हर  तरह की  सफलता  में  योगदान  रहता है इसलिए  मनुष्य को हमेशा  मीठी  वाणी  बोलनी चाहिए।

वाणी  में इतनी  शक्ति  होती है कि  कड़वा  बोलने  वाले  व्यक्ति  का  शहद  भी  नहीं  बिकता है जब कि  मृदुभाषी  व्यक्ति की  मिर्ची, करेला  जैसी  वस्तु  भी बिक  जाती हैं   ज़रुरी नहीं  कि   हम  केवल  मिठाई  खिलाकर  ही  दूसरों  का मुँह  मीठा  करेंहम मीठा   बोलकर   भी  खुशी  दे  सकते हैं 

मृदुभाषी  में  इतनी ताकत होती है  कि  पराया  व्यक्ति  या  दुश्मन  भी   अपना  हितैषी  बन  जाता है । कबीरदासजी  कहते हैं कि जिहवा  में  अमृत  बसै  जो  कोई  जाने  बोल,  बिष बासुकि का उतरै  जिह्वा  तानै  हिलोल।।"


उषा  पंवार, email: upr4fab@gmail.com, The Fabindia school, Bali

कीर्ति मालवीय: दिमाग और दिल

दिमाग और दिल भले ही शरीर के अलग - अलग स्थान पर है परंतु यह दोनों हमारे बहुत काम आते हैंदिमाग और दिल एक दूसरे से पूर्ण रूप से विपरीत है l किसी भी व्यक्ति को कोई निर्णय लेना हो तो उसे दिल तथा दिमाग दोनों की सुननी चाहिए l किसी एक को दूसरे पर भारी नहीं होने देना चाहिए l हमें हमेशा दोनों तरफ से सोच -विचार करने के बाद फैसला लेना चाहिए और ऐसा निर्णय जिससे कोई तकलीफ़ हो l हमें परिस्थिति के हिसाब से निर्णय लेना चाहिए क्योंकि कई बार हमें जहाँ दिल की बुद्धिमत्ता का प्रयोग करना चाहिए वहाँ हम दिमाग की बुद्धिमत्ता और जहाँ दिमाग की आवश्यकता होती है वहाँ दिल की बुद्धिमत्ता का प्रयोग कर लेते हैं और अपने आप के लिए कठिनाइयाँ बढ़ा देते हैं l
            
हमें सफल जिंदगी जीने के लिए इन दोनों का समझदारी से उपयोग करना चाहिए क्योंकि अगर यह बुद्धिमत्ता परेशानियाँ मिटा सकती है तो यह ही है जो उन परेशानियों का कारण भी बन सकती हैजब हम रिश्ते मजबूत करने के बारे में सोचते है तब हमें हमेशा अपने दिल की बुद्धिमत्ता की सुननी चाहिए परन्तु जब उन्हीं रिश्तों को बनाए रखने की बात आती है तब दिमाग ही हमें सही राह दिखाता है l यह कहना गलत नहीं होगा कि कई बार दिल की आवाज झूठ भी हो सकती है क्योंकि जो हम चाहे वह हमारा दिल मान लेगा और अच्छे विचार आएँगे परन्तु दिमाग ऐसा बिलकुल नहीं करता वह हमेशा हमें सच्चाई से सामना करवाता है और उसके सामने खड़े होने में सहायता करता है l   
           
जब कोई व्यक्ति सिर्फ अपने दिल से निर्णय लेता है तब ज्यादातर वह व्यक्ति कठोर परिस्थिति में स्थिर खड़ा नहीं रह पाता, उस परिस्थिति का डट कर सामना नहीं कर पाता और अंतर से टूट जाता है परन्तु अगर कोई व्यक्ति है जो सिर्फ अपने दिमाग की बात सुनता है वह  कठिन परिस्थिति में हिम्मत नहीं हारेगा वह उस परिस्थिति से बाहर तो जायेगा लेकिन उसे कुछ और नहीं सूझेगा वह सिर्फ अपने बारे में सोचेगा और वह स्वार्थी भी बन सकता हैइसलिए एक समझदार व्यक्ति कभी भी दिमाग को दिल पर या दिल को दिमाग पर हावी नहीं होने देतावह दिमाग तथा दिल, दोनों की बुद्धिमत्ता एक साथ लेकर चलता है l जिसका  जितना उपयोग करना है  उतना ही उसका उपयोग करता है l जब हम अंदर से दुखी होते हैं और परेशान होते तब हमारा दिमाग काम नहीं करता और हम कोई  भी निर्णय दिल से लेते हैं जिससे आगे चल कर हम पछताते हैंजब हम ज्यादा खुश या ज्यादा दुखी होते हैं तब हमें कोई भी निर्णय नहीं लेना चाहिए  l 
            
अतः  बुद्धिमत्ता दिमाग की और बुद्धिमत्ता दिल की हमें हर निर्णय लेने में सहायता करते हैं और हमारे जीवन को सफलता से जीने के लिए मदद करते हैं l
कीर्ति मालवीय, Xll Commerce The Fabindia School

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