Sunday, September 29, 2019

कुसुम डांगी: अध्ययन का प्रथम सोपान


अध्ययन के लिए पहली सीढी हैवाचन 

हर  छात्र  अगर  प्रत्येक  दिन  नियमित  रूप  से  वाचन  करे तो  अपनी  जानकारी को  बहुत  अधिक  बढ़ा  सकता  है।

वाचन  से    केवल  जानकारी को  बढ़ाया  जा  सकता  हैबल्कि  छात्र  के अन्दर  सकारात्मक  सोचरीति-रिवाजों  के प्रति  प्रेम  की  भावना  भी  उत्पन्न  होती  है।

इसके  लिए  जरूरी  नहीं उच्च लेवल  की पुस्तकों  का  चयन  करें  वह  अपनी  रुचि  के  अनुसार  भी  चयन  कर  सकता है।

वाचन  दो  प्रकार   से   किया  जा  सकता  है 
(!)  सस्वर वाचन   
(!!) मौन  वाचन

वाचन   अगर  छोटे  बच्चों  के  लिए  किया  जा  रहा  है  तो चित्रसाउंड  आदि  से  उनमें रुचि   लायी  जा  सकती   है     उनके  अनुसार  गतिविधियाँ  भी  करायी  जा  सकती  है।

विद्यालय  में  छात्रों  में  वाचन  की  रुचि  उत्पन्न  करने  के  लिए  एक  अच्छा  पुस्तकालय का   होना  अत्यावश्यक  है  साथ  ही  पुस्तकालय  अध्यापक  की  पुस्तकों  के  प्रति जानकारी  भी  अत्यावश्यक  है  ताकि  वह  छात्रों  की  उनकी  रूचि  के  अनुसार  पुस्तकें खोजने  में  मदद  कर  सके।

पुस्तकें  चरित्र   निर्माण  का  सर्वोत्तम  साधन  है।

वाचन, ज्ञान  अर्जित  करने  के  अतिरिक्त मनोरंजन  के  लिए  भी  किया  जाता  है। इससें  मन    मस्तिष्क  स्वस्थ  रहता है ।वाचन से सोचने  समझने  की  क्षमता  भी  बढती  है 

जीवन  में  सफलता  पाने  के  लिए  नियमित  रूप  से  वाचन  करना  अत्यावश्यक  है।

Kusum Dangi, The Fabindia School
kdi4fab@gmail.com

सुरेश नेगी:पढ़ना एक कौशल है


पढ़ना भाषा अधिग्रहण,संचार ,सूचना और विचारों को साझा करने का एक साधन है।

पढ़ना एक सबसे बुनियादी कौशल है जिसे एक बच्चे को अपने जीवन में सफल होने के लिए सीखने की जरूरत है। पढ़ने की अच्छी आदतें विकसित करना आप और आपके बच्चे के भविष्य के लिए न केवल शैक्षणिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी महत्वपूर्ण है। पढ़ने से शब्दावली का विकास होता है। कम उम्र से पढ़ने की आदतों की वजह से ही एक बच्चे के दिमाग में शब्दावली का विकास होता है पढ़ने के कारण ही बच्चे का ध्यान किसी भी विषय में लम्बे समय तक लगा रहता है, साथ ही साथ उसमें दूसरी चीजों को समझने का विकास भी होता है।

इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता है कि हमने जो कुछ भी अभी तक सीखा है वो सब पुस्तकें पढ़ने के कारण ही हुआ है। पुस्तकें पढ़ने से हमें आए दिन कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता है जो हमारे ज्ञान में बढ़ोतरी करता है। पुस्तकें हमें बाहरी दुनिया से अवगत कराती है साथ ही साथ हमें सांसारिक विषयों के बारे में संवेदना हासिल करने में भी मदद करती है।

पुस्तकें पढ़ने से एक अच्छे चरित्र का निर्माण होता है। यह आपके आत्मविश्वास और विश्वास को बढ़ाने में मदद करता है। पढ़ने से आपका, जीवन को देखने का नजरिया भी बदल जाएगा साथ ही यह आपके सामाजिक कौशल को भी बढ़ाएगा। पढ़ने की आदत सबसे अच्छे गुणों में से एक है जो इंसान लगातार पढ़ता रहता है वो पुस्तक को अपना दोस्त समझने लगता है और अपने व्यस्त जीवन में से अपने दोस्त के लिए समय निकाल ही लेता है। अगर आप एक बार पुस्तकें पढ़ना शुरू कर देते हो तो इसे अपनी आदत बना लें क्योंकि पुस्तकें पढ़ने से मानसिक तनाव कम होता है और आप एक अच्छे मूड में रहते हैं सोने से पहले पुस्तक पढ़ने से नींद भी अच्छी आती है। लम्बी यात्रा के समय पुस्तक पढ़ने से आपको बोरियत महसूस नहीं होगी।

इसलिए आप जीवन में जितना भी व्यस्त हो अपने लिए और पुस्तकें पढ़ने क लिए समय निकालना कभी भी न भूलें।
Suresh Negi, The Fabindia School
sni4fab@gmail.com

Building Learning Power

Learning power is a phrase coined by Guy Claxton to denote the ability to know what to do when you have not been told what to do.

Courtesy Prof MM Pant
This is very different from the Skinner type behaviourism and programmed learning.

Following a different path, Jeanette Wing had proposed the importance of Computational Thinking as an essential skill for all, not only computer professionals.

And Peter Senge had conceptualised ‘ learning organisations’ and “Schools that learn” as precursors to the present-day algorithms that learn.

Building Learning Power is about:
* Helping young people become better learners
* Developing their portable learning power
* Preparing young people for a lifetime of learning
What is BLP based on?
* An extensive body of research into learning and the brain
* Recent research into the key dimensions of learning power
* Practical trials in schools across the country
* The pioneering work of Professor Guy Claxton, who is programme consultant, and chief inspiration, for TLO’s Building Learning Power program.

How does it work?
Building Learning Power:
* provides a coherent picture of what it takes to be a good learner
* capitalises on previous learning-to-learn ideas
* grows a student’s learning character and habits
* develops the appetite and ability to learn in different ways
* transforms the culture of the classroom and the climate of the school
* shifts responsibility for learning to learn from the teacher to the learner
* engages teachers and students creatively as researchers in learning
* gives schools the opportunity to track students’ learning power

What effect will BLP have?
* raised achievement
* improved behaviour
* increased motivation
* supple learning minds
* increased enjoyment in learning
* established habits of lifelong learning
* enhanced creativity

Resources for knowing more: 

Building learning power: https://youtu.be/WlYRhoWtoiM

TEDx talk by Guy Claxton: https://youtu.be/JxWybvns1jg

What is the point of Schools: Guy Claxton: https://youtu.be/BqRu74M_1Gw

Does assessment kill creativity? https://youtu.be/gPnuJv3FI3A

Tuesday, September 24, 2019

Prerna Rathod: Speaking – A Way To Communicate


Speaking is the best way of communicating with the world. It helps us to express our thoughts and ideas and keep our point of view in front of others. Speaking brings us close to others, as we are able to take part in a group discussion in the classroom or outside and people will listen to your thoughts. If you are not able to share your views in a group, you will be left alone. Nobody will respect you for this. Some advantages of speaking are as follows:

1. Increase in Confidence level: Speaking increases our confidence level. When you start speaking in small groups, then you start gaining confidence. This habit helps to conquer our fears and nervousness. And you become ready to face the world.

2. Critical Thinking:  When you become a good speaker, your thinking power increases. You will always think in a  different way and out of the box. You will think twice before speaking anything.

3. Personality Development:  Speaking with confidence and fluently brings a tremendous
change in our personality. We know when, where and how to speak, so it helps us to gain respect and friendship of others.

4. Success in Profession: During interviews, if we are able to face all questions confidently  and answer in the correct way, then we will get success in our life.

5. Respect in Society:  Once we are successful in our life we will get respect from our
colleagues, staff and society. All will be eager to work with us and would also like to be in our company.

Thus, speaking habits are very much necessary in our daily life. People will know our worth and we will always be ready to face any situation in life. Each one must inculcate this skill in their life.
Prerna Rathod, The Fabindia School
prd4fab@gmail.com

उषा पंवार:आत्मविश्वास से बोलना

केयूराणि भूषयन्ति पुरुषं हारा चन्द्रोज्वला:
स्नानं विलेपनं कुसुमं नालकृंता मूर्धजा:
वाण्येका समलकरोति पुरुषं या संस्कृता धार्यते
क्षीयन्ते खलु भूषणानि सततम्केका वाग्भूषणम भूषणमं।।

बाजुबंद पुरुष को शोभित नहीं करते और हीं चंद्रमा के समान हार, स्नान, चन्दन, फूल और सजे हुए केश शोभा बढ़ाते हैं। केवल सुसंस्कृत प्रकार से धारण की हुई एक वाणी ही उसकी शोभा बढ़ाती हैं साधारण आभूषण नष्ट हो जाते है, वाणी ही सनातन आभूषण हैं।

मनुष्य की वाणी में इतनी शक्ति होती हैं कि वह पूरे राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। वाणी में इतनी शक्ति है कि किसी का दिल भी जीत सकते हैं मनुष्य को बचपन से ही हर स्तर पर , प्रत्येक क्षेत्र में बोलना ही पड़ता हैं जो इन्सान बोलना सीख गया वह प्रत्येक क्षेत्र में जिन्दगी में सफल हो सकते है। वाणी में अपार शक्ति है।

जो भी शब्द बोले पूरी तरह से स्पष्ट हो साफ़ हो। स्पष्ट शब्द जल्दी दूसरो को ज्यादा समझ सकें। बोली में मधुरता हो। शब्दों में भाव होने के साथ स्पष्ट उच्चारण से बोले। आज का युग तकनीकी युग है। आवाज़ को रिकार्ड कर के बोले। आत्मविश्वास के साथ अपने विचारों को धीरे धीरे और सावधानी से बोले। एक सर्वश्रेष्ठ बोलने वाले को सबसे पहले सर्वश्रेष्ठ सुनने वाला होना चाहिए। बोलना सुनना सभी क्षेत्रों में होते हैं। अधिक से अधिक पुस्तकें पढ़नी चाहिए जिससे ज्ञान बढ़े और अधिक विचार आयेंगे और विश्वास के साथ बोल सके।

छोटे बच्चे पढ ना लिखना शुरू कर ने से बहुत पहले सुनने और देखकर बोलने लगते हैं, वे सीखते हैं कि बोलकर वे अपनी जरूरतों और इच्छाओं को व्यक्त कर सकते हैं। खेलों एवं अनेक रंगीन चित्रों, वस्तुओं को देखकर बच्चो में भाषा कौशल से सुनने, बोलने के अवसर मिलते हैं। अन्य गतिविधियों, खेलों, समूह में बातचीत करने के माध्यम से बच्चों में ध्यानपूर्वक सुनने सुनकर निर्देश का पालन करने और बेझिझक बोलने के गुर को बढ़ावा दे सकते हैं। बच्चों के बोलने के उच्चारण में स्पष्टता और शुद्धता लाना कहानियों, रंगीन चित्रों के माध्यम से शब्दकोश बढ़ाया जा सकता हैं। बातचीत मानव विकास का हिस्सा है जो सोचने ,विचारने, सीखने में हमारी मदद करती हैं।

जैसे किसी शिक्षक द्वारा छात्र को कुछ प्रश्न पूछे जाने पर छात्र द्वारा उस प्रश्न का उत्तर देना चाहे वह गलत हो परन्तु छात्र द्वारा आत्मविश्वास से बोलने का प्रयास किया हैं उन्हें प्रोत्सहित करना चाहिए बोलने से ही गुण अवगुण का पता चलता है। जिस व्यक्ति में आत्म विश्वास से बोलने की कला होती है वह दुनिया के सामने अपनी बात को प्रभावी तरीके से पेश कर पाता है जिसकी बातचीत में नम्रता, मिठास, प्रसन्नता, दया और प्रोत्साहन होता है असल मायने में वही व्यक्ति अच्छा बोलने वाला (वक्ता)होता है। तौल मौल के बोल का पालन होना चाहिए।

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए
औरन  को शीतल करे, आपहू शीतल होए।
Usha Panwar, The Fabindia School
upr4fab@gmail.com